Sunday, April 15, 2018

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामाजिक समरसता मंच द्वारा कार्यक्रम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामाजिक समरसता मंच द्वारा कार्यक्रम सेवा भारती विवेकानंद विद्या मंदिर नंद ग्राम गाजियाबाद में आयोजित किया गया मुख्य वक्ता शांत प्रकाश जाटव दिनांक 15 अप्रैल 2018

Monday, March 26, 2018

गवर्नमेंट बॉयस मिडिल स्कूल, जी ब्लॉक, नानकपुरा, नई दिल्ली 1977 सातवीं कक्षा में जब हम पढ़ते थे तब का फोटो कोई पुराने मित्र इसमें अपनी फोटो देखकर पहचान पाए तो संपर्क करें

गवर्नमेंट बॉयस मिडिल स्कूल, जी ब्लॉक, नानकपुरा, नई दिल्ली 1977 सातवीं कक्षा में जब हम पढ़ते थे तब का फोटो कोई पुराने मित्र इसमें अपनी फोटो देखकर पहचान पाए तो संपर्क करें

Saturday, March 24, 2018

एससी व एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से देशभर में रोष भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख पुनर्विचार के लिए आग्रह किया

एससी व एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से देशभर में रोष भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख पुनर्विचार के लिए आग्रह किया

Friday, March 23, 2018

एससी एक्ट में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने अफसोस जताया, प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कानून में संशोधन की मांग की

संवाददाता.
नई दिल्ली. 23 मार्च. वरिष्ठ भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी एक्ट में किये गये बदलाव पर अफसोस जताते हुए कहा है, कि यह निर्णय अनुसूचित जाति के उत्पीड़न को बढ़ावा देगा. जाटव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुसूचित जाति व जनजाति के उत्पीड़न पर तुरंत एफआईआर तथा गिरफ्तारी रोकने पर पुनर्विचार करने तथा कानून में संशोधन की मांग की है. शांत प्रकाश जाटव ने कहा कि कानून में उक्त संशोधन न केवल कानून के दुरुपयोग को रोकेगा बल्कि समाज में व्याप्त समस्या को खत्म करने में सहयोग करेगा. 

उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है, कि समाज हित में अनुसूचित जाति जनजाति कानून में संशोधन कराने का कष्ट करें तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को पुनर्विचार कर ‘जैसा था वैसा ही रहने दिया जाए.’

जाटव ने प्रधानमंत्री के नाम लिखे इस पत्र में कहा है, कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पुणे महाराष्ट्र में दर्ज एक शिकायत, जिसमें शिकायतकर्ता ने दो अधिकारियों के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के अंतर्गत शिकायत की थी, उसके गलत पाये जाने पर सर्वोच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति जनजाति कानून के अंतर्गत तुरंत एफआईआर तथा गिरफ्तारी पर जो रोक लगाई है, वह दुर्भाग्यूपर्ण है. पत्र में जाटव ने सामाजिक न्याय विभाग द्वारा प्रकाशित आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि वर्ष 2015 में कुल 15638 मामले अनुसूचित जाति जनजाति कानून के अंतर्गत दर्ज हुए, जिनमें 11024 में अभियुक्त बरी हुए, 495 मामलों में केस वापसी तथा  4119 को सजा मिली.

उन्होंने कहा कि उक्त आंकड़ों से यह साफ है कि 4119 मामले अपराध होने की स्पष्ट तौर पर पुष्टि करते हैं, जो एक कड़वी सच्चाई है. उन्होंने कहा कि भारत को आजाद हुए 70 वर्ष हो चुके हैं और आज भी दबंगों द्वारा कमजोर व गरीब वर्ग पर अस्पृश्यता  के आधार पर किए जा रहे अत्याचार दुर्भाग्यपूर्ण हैं.

जाटव ने पत्र में लिखा है, कि एक बात और विचारणीय है, कि जो 495 मामले वापस लिए गए उसमें भी पीड़ित पर कितना सामाजिक दबाव बनाया गया होगा, जिसके चलते मामले वापस लिए गए.

प्रधानमंत्री के नाम लिखे इस पत्र में कहा गया है, कि यह भी कटु सत्य है कि व्यक्तिगत विद्वेष के कारण या किसी के प्रभाव के कारण झूठे मामले भी दर्ज हुए. ऐसे में जरूरी है, कि इस प्रकार के झूठे मामले साबित होने पर शिकायतकर्ता पर मामला दर्ज करते हुए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. ना कि अनुसूचित जाति के हितग्राही इस कानून को बदला जाये.

Thursday, March 15, 2018

कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज गाजियाबाद में नशा मुक्त भारत वर्ष कार्यक्रम माया ममता चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित हुआ मुख्य अतिथि महापौर आशा शर्मा व विशिष्ट अतिथि शांत प्रकाश जाटव

कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज गाजियाबाद में नशा मुक्त भारत वर्ष कार्यक्रम माया ममता चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित हुआ मुख्य अतिथि महापौर आशा शर्मा व विशिष्ट अतिथि शांत प्रकाश जाटव आयोजक श्रीमती ममता गुप्ता दिनांक 15 मार्च 2018

Tuesday, March 06, 2018

मायावती समाज को गुमराह करना बंद करो

मुझे याद है TV पर खबर चल रही थी मायावती को मुलायम सिंह यादव के विधायकों और गुंडों ने सरकारी गेस्ट हाउस में बंधक बना लिया है उसे मारने का प्रयत्न किया जा रहा है पुलिस प्रशासन गुंडों के साथ उस घटना को अंजाम देने के लिए आतुर है लगातार टीवी पर कवरेज दिखाई जा रही थी बताया जा रहा था लोकतंत्र और एक महिला की लाज खतरे में है, अंतरात्मा को यह खबर झकझोर रही थी और विपक्षी होने के बावजूद मन से आवाज़ आ रही थी की हे ईश्वर इस महिला की मदद करो।
तब हमारे भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व व संघ के वरिष्ठ नेतृत्व नें तुरंत निर्णय लिया की मायावती को तुरंत बचाया जाए इस निर्णय के बाद संघ के स्वयंसेवक भाई ब्रह्मदत्त द्विवेदी जी वहां जाकर गुंडों से भिड़ गए और एक विधायक जो गैस सिलेंडर लेकर विस्फोट करने की योजना बना रहा था उसके मंसूबों को द्विवेदी जी ने न केवल खत्म किया बल्कि मायावती को बचाया।
दिल्ली से हमारे वरिष्ठ नेता आदरणीया सुषमा स्वराज जी के नेतृत्व में स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचे और उन्होंने मायावती को एक नया जीवन दिया और आज वही मायावती उसी जीवनदाई पार्टी भारतीय जनता पार्टी को न केवल नीचा दिखाने का प्रयास कर रही है बल्कि उसके खिलाफ उन्हीं गुंडई ताकतों के साथ मिल गई है जिन्होंने कभी मायावती के जीवन को खत्म करने की योजना रची थी।
मायावती ने संपूर्ण समाज को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह बात कभी मंच से नहीं कहीं मायावती ने हमेशा भारतीय जनता पार्टी को बुरा भला ही कहा जबकि भारतीय जनता पार्टी ने मायावती को कई दफा उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने में भी सहयोग किया समाज को गुमराह करने की फितरत मायावती की शुरू से रही है एहसान फरामोशी और बेवफाई मायावती के कतरे कतरे में है ब्राह्मणों को कोस कर दलित समाज को गुमराह करने की फितरत मायावती में शुरू से है आज समय आ गया है कि मायावती की विचारधारा को समाज छोड़ें और देश की प्रगति में भारतीय जनता पार्टी के साथ में कंधे से कंधा मिलाकर के योगदान दें यह देश सर्वधर्मीय और सर्वजातीय है भारतीय जनता पार्टी एक सच्ची लोकतांत्रिक पार्टी है जिसमें धर्म या जाति देख कर योजना नहीं बनाई जाती।
राष्ट्रवादी विचारधारा को सर्वोपरि रखते हुए देश के विकास सामाजिक विकास सामाजिक उत्थान और प्रगति की ओर चलना यही मूल उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी का है और उसी पर चलते हुए नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अपना परचम देशभर में फैला रही है
शान्त प्रकाश जाटव, ग़ाज़ियाबाद
6 मार्च 2018

Monday, March 05, 2018

चमार रेजिमेंट

Chamar Regiment

सावधान मायावती फिर दलितों को छलने जा रही है

सवा लाख नौकरियों में रिवर्ट हुए दलितों की दोषी मायावती समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर रही है जिसने राज्यसभा में प्रोन्नति में आरक्षण का प्रस्ताव फाड़ कर फेंक दिया था
मायावती फिर दलितों को छलने जा रही है
Check out @shantprakash’s Tweet: https://twitter.com/shantprakash/status/970516163930263554?s=09

Wednesday, February 07, 2018

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वैशाली महानगर के सामाजिक समरसता मंच द्वारा रविवार 4 फरवरी 2018 को स्वामी विवेकानंद सरस्वती विद्या मंदिर, राजेंद्र नगर में विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वैशाली महानगर के सामाजिक समरसता मंच द्वारा रविवार 4 फरवरी 2018 को स्वामी विवेकानंद सरस्वती विद्या मंदिर, राजेंद्र नगर में विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ
मुख्यवक्ता - शान्त प्रकाश जाटव

Wednesday, January 03, 2018

चमार और महार समुदाय का बुनियादी फर्क सामने आया, चमार रेजीमेंट के शौर्य की इबारत शौर्य दिवस के मुकाबले कहीं ज्यादा चमकीली

January 3, 

सांकेतिक चित्र


नई दिल्ली. 03 जनवरी. भीमा कोरेगांव में शौर्य प्रदर्शन के कार्यक्रम में हंगामे पर रोष व्यक्त करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता तथा अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के अध्यक्ष शांत प्रकाश जाटव ने कहा है, कि ईस्‍ट इंडिया कंपनी के साथ मिलकर 1818 में जहां महार सैनिकों ने भारत में अंग्रेजों को मजबूत किया था, वहीं 1943 में आजाद हिंद फौज के नेतृत्व में लड़ी चमार रेजीमेंट ने अंग्रेजों के दांत खट्टे करते हुए वीरता की नई इबारत लिखी थी.


shant prakash jatav

जाटव ने कहा कि महार और चमार समुदाय के बीच का यह बुनियादी फर्क आज भी देखने को मिल रहा है. जहां एक ओर देश का चमार समुदाय राष्ट्रहित में देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है, वहीं महार समुदाय आज भी 200 वर्ष पुरानी उस दासता को शौर्य के नाम पर ढोने का कोशिश कर रहा है, जो शौर्य उनका न होकर अंग्रेजों का था. उन्होंने कहा कि भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के बाद एक बार फिर चमार और महार समुदाय का बुनियादी फर्क सामने आ गया है तथा चमार रेजीमेंट के शौर्य की इबारत शौर्य दिवस के मुकाबले कहीं ज्यादा चमकीली है. शांत प्रकाश जाटव ने कहा कि कोरेगांव युद्ध को जो महार जाति अपनी अस्मिता के साथ जोड़ती है, वह यह क्यूं भूल जाती है, कि ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज के ये महार सैनिक अपने लिए नहीं बल्कि अंग्रेजों के लिए लड़े थे. देश में चमार रेजीमेंट की बहाली की लड़ाई लड़ रहे जाटव ने कहा कि कैसा दुर्भाग्य है, कि देश के दुश्मनों के साथ मिलकर लड़े लोग शौर्य दिवस मना रहे हैं, जबकि देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाली वीर चमार रेजीमेंट के सैनिकों की वीरता और रेजीमेंट की बहाली और उसके सम्मान के लिए उन्हें देश में ही लड़ाई लड़नी पड़ रही है.  यह भी पढ़ें : भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की मांग दोहराई, चमार रेजीमेंट के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी के दर्जे की मांग  गौरतलब है, कि भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने अक्‍टूबर 2015 में केंद्र सरकार से इस रेजीमेंट की बहाली की मांग की थी. उनकी इस मांग पर नवंबर 2015 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने लिखा था कि वह मामले की जांच करवायेंगे. इसके बाद शांत प्रकाश जाटव ने इस मामले को प्रधानमंत्री के समक्ष भी उठाया है, जिस पर उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला है. जाटव ने मौजूदा भीमा कोरेगांव हिंसा को दुखद बताते हुए कहा कि वर्तमान समय राष्ट्रवादी और राष्ट्रविरोधी शक्तियों के बीच द्वंद का समय है. उन्होंने कहा कि आज देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता देख राष्ट्रविरोधी सत्तालोलुप शक्तियां किसी भी हालत में देश की शांति को भंग करने में जुटी हैं. 
वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि अब यह देश को तय करना है, कि अंग्रेजों की चाकरी और चाटुकारिता करने वाले लोग देश के आदर्श होंगे या फिर हिंदुस्तान की आजादी के लिए लड़ाई लड़ने वाले चमार रेजीमेंट के वे वीर सैनिक जिन्होंने देश की आन-बान-शान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया था.

Monday, January 01, 2018

जाटव अछूत नहीं बल्कि कनवर्टेड यादव व राजपूत हैं

खुद को 5000 साल से दलित शोषित पीड़ित वंचित कहने वाले जाटव 1932 तक यादव या राजपूत थे।

श्री यादव जाटव राजपूत कष्ट निवारक सभा लोटी सफियाबाद के नेताओं की मांग पर 14 जुलाई 1932 को यू. पी. कौंसिल ने उनको निम्नलिखित आदेशानुसार जाटव तय किया
"14 जुलाई सन 1932 ईस्वी नम्बरी C.B. 5523-5568 बनाम कलक्टर साहब बुलंदशहर मिस्टर H.C बालटन साहब बहादुर C.S.I.I.C.S. 1-252 B जूनियर मैम्बर तहरीर फरमाते हैं कि कौन्सिल के प्रश्न नम्बर 65-66-67 उत्तर सहित भेजे जाते हैं और लिखा जाता है कि यू.पी. प्रान्त के तमाम जिलों के कलक्टर महोदयों को जाटव नाम लिखने की सूचना दी है कि इनको जाटव नाम से लिखें"


श्री यादव जाटव राजपूत कष्ट निवारक सभा लोटी सफियाबाद द्वारा जारी बिरादरी सर्टिफिकेट

Saturday, December 16, 2017

भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की मांग दोहराई, चमार रेजीमेंट के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी के दर्जे की मांग


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भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की मांग दोहराई, चमार रेजीमेंट के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी के दर्जे की मांग


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 December 4, 2017 


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चमार रेजीमेंट के सैनिक चुन्नीलाल को पगड़ी बांधकर सम्मानित करते भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव


नई दिल्ली. 04 दिसंबर. अखिल भारतीय हिंदू जाटव महासभा के अध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी के नेता शांत प्रकाश जाटव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वीर चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुर्नस्थापना किये जाने तथा चमार रेजीमेंट के शहीद सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिये जाने की मांग दोहराई है.


प्रधानमंत्री के नाम लिखे पत्र की प्रतिलिपि


जाटव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में लिखा है, कि चमार रेजीमेंट ने 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर सुभाषचंद्र बोस के साथ आईएनए में शामिल होकर, अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करते हुए उनके दांत खट्टे कर दिए थे. जिसके परिणामस्वरुप देश में विद्रोह की लहर उठी और अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. उसी दौरान अंग्रेजों ने सुभाषचंद्र बोस को वॉर क्रिमिनल घोषित किया और चमार रेजीमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी भारतीय सेना में पुन: बहाली हेतु वह मांग कर रहे हैं. विदित हो कि श्री जाटव ने इसी मुद्दे को लेकर बीते 17 अक्टूबर 2015 को महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, केन्द्रीय रक्षामन्त्री तथा अन्य विभागों को पत्र लिखे थे, जिसके बाद तत्कालीन केन्द्रीय रक्षामन्त्री मनोहर पर्रिकर ने उचित कार्यवाही का आश्वासन भी दिया था. इसी मामले को लेकर केन्द्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मार्च 2017 में रक्षा सचिव को तथा नवम्बर 2017 को अनुसूचित जाति आयोग, पंजाब सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर चमार रेजीमेंट को बहाल करने की मांग की है. यह भी पढ़ें : भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव का मायावती के बयान पर तीखा हमला, लगाए गंभीर आरोप  भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने प्रधानमंत्री को यह स्मरण पत्र लिखकर याद दिलाते हुए कहा है, कि आजादी की लड़ाई में चमार रेजीमेंट के अभूतपूर्व योगदान के इतिहास को ध्यान में रखते हुए आपसे आग्रह है, कि वीर चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की जाये. साथ ही  चमार रेजीमेंट के ऐसे सैनिक जो अंग्रेजों से युद्ध के दौरान शहीद हुए या जिन्हें अंग्रेजों ने बागी घोषित कर 1943 में जेलों में यातनाएं दीं थीं, ऐसे सभी सैनिकों को राज्य सैनिक बोर्डों द्वारा सूचीबद्ध कराकर स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये. 
इसके अलावा चमार रेजीमेंट के अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने हेतु राजधानी दिल्ली सहित, सभी प्रदेशों की राजधानियों व सभी जिलों में शौर्य स्तम्भ स्थापित कराये जाने की भी मांग की है, ताकि समाज चमार जाति के गौरवशाली इतिहास को समझ सके. साथ ही श्री जाटव ने  चमार रेजीमेंट की वीरता की कथाएं पाठ्य पुस्तकों में शामिल किये जाने का भी अनुरोध किया है. श्री जाटव ने पत्र में लिखा है, कि चमार रेजीमेंट के इन वीर सैनिकों की वीरता और शहादत की कहानियां समाज को उनके पूर्वजों शौर्यगाथा से अवगत करायेंगी और मौजूदा पीढ़ी को पता चलेगा कि उनके समाज का कैसा गौरवशाली इतिहास रहा है.


Monday, December 04, 2017

अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट की भारतीय सेना में पुन: स्थापना व् सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये  

शान्त प्रकाश जाटव       
भारतीय जनता पार्टी
पूर्व राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रभारी
अनुसूचित जाति मोर्चा

279, ज्ञान खंड 1, इंदिरा पुरम, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश 9871952799

प्रतिष्ठा में,                                              
आदरणीय श्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी
माननीय प्रधानमन्त्री, भारत सरकार,
प्रधानमन्त्री कार्यालय, साउथ ब्लाक, नई दिल्ली – 110011

विषय: अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट की भारतीय सेना में पुन: स्थापना व् सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये  

मान्यवर,

वीर चमार रेजिमेंट जिसने 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर सुभाषचंद्र बोस के साथ आई एन ए में शामिल हो, अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध कर उनके दांत खट्टे कर दिए परिणाम स्वरुप देश में विद्रोह की लहर उठी और अंग्रेजों को भारत छोड़ने का कदम उठाना पड़ा उसी दौरान अंग्रेजों ने सुभाषचंद्र बोस को वॉर क्रिमिनल घोषित किया और चमार रेजिमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी भारतीय सेना में पुन: बहाली हेतु हम वर्षों से मांग कर रहे हैं 17 अक्टूबर 2015 को मैंने महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमन्त्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, केन्द्रीय रक्षामन्त्री व् अन्य विभागों को पत्र लिखे थे. तदुपरांत केन्द्रीय रक्षामन्त्री द्वारा कार्यवाही हेतु आश्वासन मिला, केन्द्रीय अनुसूचित जाति आयोग नें मार्च 2017 रक्षा सचिव को पत्र लिखा व् नवम्बर 2017 को अनुसूचित जाति आयोग, पंजाब सरकार नें भी केंद्र सरकार को पत्र लिखा. आजादी की लड़ाई में चमार रेजिमेंट के अभूतपूर्व योगदान के इतिहास को ध्यान में रखते हुए आपसे पुन: विनम्र आग्रह है की

1.     वीर चमार रेजिमेंट की शीघ्र अति शीघ्र भारतीय सेना में पुन: बहाली की जाये.

2.     चमार रेजिमेंट के सेनिकों जो अंग्रेजों से युद्ध के दौरान शहीद हुए या जिनको अंग्रेजों नें बागी घोषित कर 1943 में जेलों में बंद कर यातनाएं दीं को सभी राज्य सैनिक बोर्डों द्वारा सूचीबद्ध कराकर स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये.

3.     चमार रेजिमेंट के अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने हेतु राजधानी दिल्ली सहित, सभी प्रदेशों की राजधानियों व् समस्त जिलों में शोर्य स्तम्भ स्थापित कराये जाएँ ताकि समाज चमार जाति के गौरवशाली इतिहास को जानें उनके देशभक्ति के जज्बे को समझे और फख्र करे.

4.     चमार रेजिमेंट की वीरता की कथाएं पाठ्य पुस्तकों में शामिल की जाये.

सादर

भवदीय

(शान्त प्रकाश जाटव)

Sunday, November 19, 2017

चमारों के गौरव ब्रिटिश सरकार से द्वितीय विश्वयुद्ध युद्ध में सुभाष चंद्र बोस के पक्ष में बगावत कर अंग्रेजों के दाँत खट्टे करने वाले 1945 से 1951 तक जेल में बंद रहे चमार रेजिमेंट के वीर हवलदार चुन्नी लाल जी का पगड़ी बांध कर सम्मान करने का गौरव मुझे मिला, मैं धन्य हो गया। दिनाँक 18 नवम्बर 2017 जय चमार जय हिंदू जाटव महासभा

चमारों के गौरव ब्रिटिश सरकार से द्वितीय विश्वयुद्ध युद्ध में सुभाष चंद्र बोस के पक्ष में बगावत कर अंग्रेजों के दाँत खट्टे करने वाले 1945 से 1951 तक जेल में बंद रहे चमार रेजिमेंट के वीर हवलदार चुन्नी लाल जी का पगड़ी बांध कर सम्मान करने का गौरव मुझे मिला, मैं धन्य हो गया।
दिनाँक 18 नवम्बर 2017
जय चमार जय हिंदू जाटव महासभा

Monday, November 13, 2017

भारत की आज़ादी में योगदान देने वाली अंग्रेज सेना से बगावत कर सुभाष चंद्र बोस के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने वाली अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित "चमार रेजिमेंट" की भारतीय सेना की पुनः बहाली हेतु "विशाल धरना" दिनाँक 20 दिसंबर 2017 रामलीला मैदान में आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है

भारत की आज़ादी में योगदान देने वाली अंग्रेज सेना से बगावत कर सुभाष चंद्र बोस के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने वाली अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित "चमार रेजिमेंट" की भारतीय सेना की पुनः बहाली हेतु "विशाल धरना" दिनाँक 20 दिसंबर 2017 रामलीला मैदान में आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है

Saturday, November 11, 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें कौशाम्बी, गाज़ियाबाद में किया हवन का आयोजन दिनाँक 10 नवम्बर 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें कौशाम्बी, गाज़ियाबाद में किया हवन का आयोजन दिनाँक 10 नवम्बर 2017

Friday, October 27, 2017

भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव का मायावती के बयान पर तीखा हमला, लगाए गंभीर आरोप

 

संवाददाता. 
नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रभारी और भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के उस बयान की निंदा की है, जिसमें उन्होंने मौजूदा सरकार में दलितों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म अपनाने की धमकी दी थी. मायावती के इस ताजा बयान पर निशाना साधते हुए शांत प्रकाश जाटव ने मायावती पर छल की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कई तीखे हमले किए.
जाटव ने मायावती पर हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहते हुए मायावती ने सरकारी खजाने से अपनी मूर्तियां सार्वजनिक स्थानों पर लगवाकर समाज को छलने का काम किया. वहीं प्रमोशन में रिजर्वेशन केस में 17.38 करोड़ रुपए की फीस वकील सतीश मिश्रा को देने के बावजूद पैरोकारी के बगैर खारिज याचिका को उच्च न्यायालय की जगह सर्वोच्च न्यायालय में गलत तरीके से अपील डालकर समाज के सवा लाख कर्मचारियों को रिवर्ट करवाने का काम किया, तब उन्हें समाज का ख्याल नहीं आया. भाजपा नेता ने मायावती पर आरोप लगाते हुए कहा कि नोटबंदी के दौरान अवैध धन का कचरा हो जाने तथा उत्तर प्रदेश चुनाव में हार के बाद मायावती पूरी तरह बौखला चुकी हैं और अनर्गल प्रलाप कर रही हैं. जाटव ने मायावती के हिंदू धर्म त्यागने के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अपनी अस्थिर हो चुकी राजनीति को स्थिर करने की जुगत में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अनुसूचित जाति वर्ग के कंधे पर बैठकर अजान लगाने का असफल प्रयास करने के बाद अब बुद्धिस्ट बनने की धमकी देकर समाज को छलने की असफल कोशिश कर रही हैं. शांत प्रकाश जाटव ने कहा कि अनुसूचित समाज अब मायावती की असलियत को पहचान चुका है और उनके किसी भी झांसे में आने के लिए तैयार नहीं है.


Monday, October 23, 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के तत्वावधान में मोहन नगर ग़ाज़ियाबाद में सम्पन्न हुआ हवन दिनाँक 22 अक्टूबर 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के तत्वावधान में मोहन नगर ग़ाज़ियाबाद में सम्पन्न हुआ हवन दिनाँक 22 अक्टूबर 2017

Friday, October 13, 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें भोपुरा, ग़ाज़ियाबाद में किया हवन

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें भोपुरा, ग़ाज़ियाबाद में किया हवन दिनाँक 13 अक्टूबर 2017

Friday, October 06, 2017

मोदी जी वाराणसी में और हम तावडू गुरुग्राम में

मोदी जी वाराणसी में 22 सितम्बर 2017 और हम तावडू गुरुग्राम में अगस्त 2017 को गौसेवा ईश्वरीय सेवा

Wednesday, July 19, 2017

दलितों के कंधे पर बैठ अज़ान लगाने वाली मायावती सिर्फ नौटंकी कर रही हैं

भाजपा के वरिष्ठ नेता शांत प्रकाश जाटव ने कहा
की मायावती नौटंकी कर रही हैं वह इस्तीफा देतीं या ना देतीं उनकी सदस्यता तो वैसे भी खत्म होने वाली है. श्री जाटव ने कहा मायावती को लालू ने बिहार से राज्‍यसभा भेजने का वायदा किया था परन्‍तु अब लालू खुद उलझे हुए हैं वो बिना नितीश की सहमति के मायावती को राज्‍यसभा भेजने की स्‍थिति में नही है ऐसे में मायावती के समक्ष यही एक रास्‍ता बचता था.
उन्होंने मायावती पर आरोप लगाते हुए कहा बीएसपी प्रमुख मायावती कांग्रेस की एजेंट है बीएसपी कांग्रेस की बी टीम है जो दलितों की पीठ पर बैठ अज़ान लगाने का काम करती रही है। उन्होंने कहा मायावती कभी भी एक विशेष समुदाय के लोगो के खिलाफ नही बोली क्यों की वो समुदाय कांग्रेस का बड़ा बोट बैंक है, दलित समाज की बेटियों के साथ कई बार दुर्व्यवहार हुए पर मायावती कभी भी उनकी आवाज नही बनी, मायावती ने सहारनपुर में अंबेडकर जयंती शोभायात्रा पर भी 10 वर्ष पहले सिर्फ इसलिए रोक लगाई थी क्योंकी वहां के एक विशेष धर्म के कद्दावर नेता ने मायावती को मना किया था। उन्होंने सहारनपुर का जिक्र करते हुए कहा कि सहारनपुर में जो हिंसा हुई वो भी एक सोची समझी साजिश थी.
श्री जाटव ने चटकी लेते हुए कहा कि  मायावती का कहना है दलितों और छोटे तबकों के लोगों पर लगातार अत्याचार हो रहा है. सहारनपुर में दलितों का बड़े पैमाने पर उत्पीड़न हुआ. गुजरात के ऊना में दलितों पर अत्याचार हुआ. मुझे शब्बीरपुर में हेलीकॉप्टर से जाने की इजाजत नहीं दी गई. मुझे सड़क के रास्ते जाना पड़ा. जब मैं गांव पहुंची तो डीएम और एसपी गायब थे. मैंने वहां कोई ऐसी बात नहीं कही जिससे समुदायों के बीच लड़ाई हो जाए. यूपी में अभी भी महाजंगलराज और महागुंडाराज है. हमें पीड़ितों की मदद के लिए भी प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ी. जबकि मायावती के टाइम में जो अत्याचार लोगो पर हुए वह भुलाये नही जा सकते। *बसपा के नारे तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार* इस नारे से ही समझा जा सकता है की मायावती कितनी घटिया स्तर की राजनीति करती रही है. चूंकि बसपा कांग्रेस की बी टीम है इसलिए आज तक मायावती ने कभी भी कांग्रेस के काले कारनामों के खिलाफ एक शब्द भी नही बोला। उन्होंने कहा की राष्ट्रपति चुनाव में मीरा कुमार का समर्थन कर ये बात साबित भी कर दी है। श्री जाटव ने कहा आज मायावती का इस्तीफा देना भी राजनीति से प्रेरित है उनका राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल अगले साल अप्रैल में खत्म हो रहा है. सदन में पुनः चुन कर आने लायक उनकी पार्टी के पास विधायक नहीं हैं बीएसपी की विधानसभा के भीतर ताकत महज 19 विधायकों की रह गई है. अब इतने कम विधायकों के नाम पर उनकी सदन के भीतर दोबारा इंट्री तो नामुमकिन ही थी. लिहाजा शहीद बनने का प्रयास कर भोले भाले गरीब दलितों को फिर गुमराह करने की कोशिश मायावती कर रही हैं.
उन्होंने कहा दरअसल, मायावती दलित राजनीति में बीजेपी द्वारा उठाये गए कदमों से परेशान है. गैर जाटव दलित समुदाय के रामनाथ कोविंद को देश के सर्वोच्च पद के लिए आगे बढ़ाकर बीजेपी यूपी समेत बाकी राज्यों में भी अपनी साख बढ़ा रही है और राजनीति के इस सियासी खेल में फिलहाल बाजी मारती दिख रही है.

Wednesday, March 08, 2017

श्रीकान्त शर्मा जी को नॉमिनेशन भरवाने के बाद कार्यालय के उद्घाटन के समय


श्रीमती चमेली देवी सोलंकी, अध्यक्ष, जिला पंचायत, पलवल, हरियाणा नें मुझे शाल भेंट कर स्वागत किया


Chameli Devi Solanki, Jila Panchayat Adhyksh, Palwal नें पुष्प गुच्छ देकर मेरा स्वागत किया


Meeting with Youth Party workers at Palwal and Hodal, Distt Hariyana








Smt. Seema Upadhyay Secretary Delhi State BJP and Youth BJP leaders at 11 Ashok Road


जय भोले शंकर जय शिव शंकर














भाजपा नेता शान्त प्रकाश जाटव की मुहीम हुई कामयाब रक्षा मंत्री के बाद अनुसूचित जाति आयोग ने चमार रेजिमेंट बहाली के लिया संज्ञान

क्या ‘चमार रेजीमेंट’ फिर होगी बहाल, आयोग ने केंद्र को दिया नोटिस

Updated: February 28, 2017, 7:11 PM IST
   
क्‍या आपको पता है कि सेना में चमार रेजीमेंट भी थी, जो सिर्फ 3 साल ही अस्‍तित्‍व में रही. अब सेना में इस रेजीमेंट की बहाली के लिए पहली बार कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है. इसकी मांग को लेकर होने वाले कुछ प्रदर्शनों की खबरों पर राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लिया है.
आयोग के सदस्‍य ईश्‍वर सिंह ने रक्षा सचिव को नोटिस कर दिया है. दलितों का यह बड़ा मामला पहली बार इस स्‍तर पर उठाया जा रहा है. ईश्‍वर सिंह ने न्‍यूज 18 हिंदी डॉटकॉम से बातचीत में कहा कि आज ही सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है कि आखिर इस रेजीमेंट को किन कारणों से बंद किया गया.
ईश्‍वर सिंह का कहना है कि दलित किसी भी विषम परिस्‍थिति में रह लेता है. उतनी कठिनाई में शायद ही कोई और जीवन व्‍यतीत करता हो जितनी में ये लोग रहते हैं फिर भी इनकी रेजीमेंट सेना में बहाल क्‍यों नहीं की जा रही है. इस नोटिस के बाद नई बहस छिड़ने की उम्‍मीद है. आजादी के बाद से ही चमार रेजीमेंट बहाल किए जाने की आवाज कई बार उठाई गई, लेकिन आवाज दबकर रह गई. दलित इस रेजीमेंट को बहाल करने के लिए कई राज्‍यों में प्रदर्शन कर चुके हैं

ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि चमार रेजीमेंट थी तो उसे क्‍यों खत्‍म किया गया. बीजेपी अनुसूचित मोर्चा 
से जुड़े दलित नेता शान्त प्रकाश जाटव ने अक्‍टूबर 2015 में केंद्र सरकार से इस रेजीमेंट की बहाली की मांग 
की थी. उनका दावा है कि इसी मांग पर नवंबर 2015 में पर्रिकर ने लिखा था कि ‘मामले की जांच करवा रहा हूं’.
चमार रेजीमेंट का इतिहास
द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अंग्रेज सरकार ने थलसेना में चमार रेजीमेंट बनार्ई थी, जो 1943 से 1946 तक अस्तित्व में रही. दलितों के कल्‍याण से जुड़े संगठनों एवं जाटव का दावा है कि वीर चमार रेजीमेंट को अंग्रेजों ने प्रतिबंधित कर दिया था. रक्षा मंत्री को लिखे पत्र में दावा किया गया है कि अंग्रेजों ने चमार रेजीमेंट को आजाद हिंद फौज से मुकाबला करने के लिए अंग्रेजों ने सिंगापुर भेजा. इस रेजीमेंट का नेतृत्व कैप्टन मोहनलाल कुरील ने किया था.
जहां कैप्टन कुरील ने देखा कि अंग्रेज चमार रेजीमेंट के सैनिकों के हाथों अपने ही देशवासियों को मरवा रहे हैं. उन्‍होंने चमार रेजीमेंट को आईएनए में शामिल कर अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने का निर्णय लिया. इसके बाद अंग्रेजों नें 1946 में चमार रेजीमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया.
चमार रेजीमेंट के बचे सिपाही, फोटो: सतनाम सिंह
अंग्रेजों से युद्ध के दौरान चमार रेजीमेंट के सैकड़ों सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी. कुछ म्यांमार व थाईलेंड के जंगलों में भटक गए. जो पकड़े गए उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया. कैप्टन मोहनलाल कुरील को भी युद्धबंदी बना लिया गया. जिन्हें आजादी के बाद रिहा किया गया. वह 1952 में उन्नाव की सफीपुर विधान सभा से विधायक भी रहे.
रेजीमेंट पर लिखी गई है किताब
हवलदार सुलतान सिंह ने ‘चमार रेजीमेंट और अनुसूचित जातियों की सेना में भागीदारी’ शीर्षक से किताब लिखी. दूसरी किताब सतनाम सिंह ने ‘चमार रेजीमेंट और उसके बहादुर सैनिकों के विद्रोह की कहानी उन्‍हीं की जुबानी’ नाम से लिखी.
इस समय सेना में मराठा लाइट इन्फेंट्री, राजपूताना राइफल्स, राजपूत रेजिमेंट, जाट रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट, डोगरा रेजिमेंट, नागा रेजिमेंट, गोरखा रेजीमेंट है.
चमार रेजीमेंट पर जेएनयू ने शुरू कराया रिसर्च
-‘चमार रेजीमेंट और उसके बहादुर सैनिकों के विद्रोह की कहानी उन्‍हीं की जुबानी’ नामक किताब के लेखक सतनाम सिंह जेएनयू में इस रेजीमेंट पर शोध कर रहे हैं. सिंह ने न्‍यूज 18 हिंदी डॉटकॉम से बातचीत में बताया इस रेजीमेंट के तीन सैनिक अभी जिंदा हैं. इसके सैनिक रहे चुन्‍नीलाल हरियाणा के महेंद्रगढ़, जोगीराम भिवानी और धर्मसिंह सोनीपत के रहने वाले हैं.
तीन माह पहले जेएनयू के मॉडर्न हिस्‍ट्री डिपार्टमेंट में रजिस्‍ट्रेशन हुआ है. इसका विषय ‘ब्रिटिश कालीन भारतीय सेना की संरचना में चमार रेजीमेंट एक ऐतिहासिक अध्‍ययन’ है. यह रेजीमेंट भी उतनी ही बड़ी थी जितनी और जातियों के नाम पर बनी रेजीमेंट.